आनंदपुर पैक्स में धान खरीद घोटाले की आशंका, लाखों के भुगतान पर उठे सवाल।
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जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत आनंदपुर पैक्स में धान खरीद के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। पैक्स में कुल 981 सदस्य पंजीकृत हैं, लेकिन 14 दिसंबर 2025 से 17 जनवरी 2026 के बीच केवल कागजों पर ही 1732 क्विंटल धान की खरीद दिखाते हुए ₹31,09,806 का भुगतान कर दिया गया। जबकि जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है। सबसे चौंकाने वाला मामला नंद किशोर यादव का है। उनके नाम से 5 जनवरी 2026 को 50 क्विंटल धान की बिक्री दर्शाते हुए ₹1,19,700 उनके खाते में भेजे गए। जब उनसे जमीन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके नाम महज 87 डिसमिल (लगभग एक बीघा) जमीन है। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में धान कहां से आया, यह बड़ा सवाल खड़ा करता है। इसी तरह 6 जनवरी 2026 को मुंबई में ऑटो चलाने वाले सौरभ कुमार मंडल के नाम से 98 क्विंटल धान बिक्री और ₹2,34,612 भुगतान का रिकॉर्ड दर्ज है। सौरभ कुमार मंडल का कहना है कि उन्हें जानकारी ही नहीं है कि वह धान बेचा है। मिथिलेश साह के नाम से 9 जनवरी 2026 को 195 क्विंटल धान की बिक्री दिखाई गई है, जिसके बदले ₹4,66,800 का भुगतान किया गया। जब इस बारे में उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह सब पैक्स अध्यक्ष ही जानते होंगे और बातचीत से बचते नजर आए। वहीं 17 जनवरी 2026 को नरेश साहू के नाम से 218 क्विंटल धान बिक्री का रिकॉर्ड दर्ज है। नरेश साहू का कहना है कि उनके पास करीब 30 बीघा जमीन जरूर है, लेकिन अभी बंटवारा नहीं हुआ है और इस वर्ष खराब मौसम के कारण उन्होंने बहुत कम धान बेचा है।
1 जनवरी 2026 को कृष्ण देव यादव के नाम से 93 क्विंटल धान बिक्री और ₹2,22,642 भुगतान दिखाया गया है, जबकि उनका दावा है कि उन्होंने मात्र 75 मन धान ही बेचा था। इसी तरह 31 दिसंबर 2025 को पिंटू कुमार के नाम से 155 क्विंटल धान की बिक्री और ₹3,71,070 भुगतान दर्शाया गया है। पिंटू कुमार का कहना है कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं है और इस संबंध में उनके भाई ही बेहतर जानकारी दे सकते हैं। इन तमाम मामलों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपये किसानों के खातों में तो पहुंच गए, लेकिन कई किसानों को यह तक पता नहीं कि उनके नाम से इतना धान कब, कहां और कैसे बेचा गया। क्या कहते हैं पदाधिकारी इस मामले में लक्ष्मीपुर के सहकारिता प्रसार पदाधिकारी विनायक कुमार से जब पूछा गया कि क्या किसानों की पोर्टल एंट्री का सत्यापन विभाग द्वारा किया जाता है, तो उन्होंने बताया कि “एक आदेश के तहत सत्यापन की जिम्मेदारी पैक्स अध्यक्ष की होती है। विभागीय स्तर पर हम लोग इसकी जांच नहीं कर पाते हैं। कम खरीदारी को लेकर उन्होंने कहा कि “चार लॉट में भुगतान किया गया है, उसी अनुसार खरीद हुई है। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई पैक्सों में अध्यक्ष अपने ही परिवार या करीबी लोगों को सदस्य बनाकर खरीदारी करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तीन पैक्स में चुनाव प्रक्रिया चल रही है और आगामी 6 फरवरी को चुनाव होना है।


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