-->
 जमुई की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई उड़ान: रावणेश्वर हॉल के जीर्णोद्धार के साथ शुरू हुआ सांस्कृतिक पुनर्जागरण

जमुई की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई उड़ान: रावणेश्वर हॉल के जीर्णोद्धार के साथ शुरू हुआ सांस्कृतिक पुनर्जागरण



 जिले की बौद्धिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक ऐतिहासिक रावणेश्वर हॉल का जीर्णोद्धार पूर्ण होने के बाद गुरुवार को बिहार सरकार की उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने इसका विधिवत उद्घाटन किया। यह अवसर केवल एक भवन के पुनरुद्धार का नहीं, बल्कि जमुई के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और बौद्धिक चेतना के पुनर्स्थापन का ऐतिहासिक क्षण बन गया।वर्ष 1939 में स्थापित रावणेश्वर हॉल दशकों तक जमुई के सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विमर्शों का प्रमुख केंद्र रहा है। समय के साथ यह भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया था, जिससे जिले के लोगों में चिंता बनी हुई थी। जिला प्रशासन के प्रयासों से इस ऐतिहासिक धरोहर का व्यापक जीर्णोद्धार कर इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित स्वरूप प्रदान किया गया है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि अपने पूर्वजों के नाम पर स्थापित इस धरोहर की दयनीय स्थिति उन्हें हमेशा पीड़ा देती थी। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक भवन को पुनर्जीवित होते देखना उनके लिए अत्यंत भावुक और गर्व का क्षण है।

मंत्री ने जिला प्रशासन, विशेषकर जिला पदाधिकारी नवीन कुमार के नेतृत्व और प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज रावणेश्वर हॉल फिर से अपनी पुरानी गरिमा और पहचान प्राप्त कर चुका है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस परिसर का और अधिक सौंदर्यीकरण किया जाएगा तथा जिले के स्टेडियमों और खेल मैदानों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि जमुई को उद्योग और खेल के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना उनकी प्राथमिकता है, ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और अवसर उपलब्ध हो सकें तथा पलायन की समस्या को कम किया जा सके। समारोह की अध्यक्षता करते हुए जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि लंबे समय से जिले में एक आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त सांस्कृतिक केंद्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसकी पूर्ति रावणेश्वर हॉल के पुनरुद्धार से हुई है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का विकास केवल सड़कों, भवनों और अन्य भौतिक संरचनाओं से नहीं होता, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक चेतना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि रावणेश्वर हॉल को हमेशा जीवंत बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन की ओर से प्रत्येक शनिवार अथवा रविवार को नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया जाएगा। इससे स्थानीय कलाकारों, साहित्यकारों और रंगकर्मियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा तथा जिले की सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। उद्घाटन समारोह में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा साहित्यकारों, रंगकर्मियों, बुद्धिजीवियों तथा बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने जिला प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे जमुई की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। रावणेश्वर हॉल का पुनरुद्धार न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक गतिविधियों का एक सशक्त केंद्र भी बनने जा रहा है। इससे जमुई को उसका पुराना सांस्कृतिक गौरव लौटाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

0 Response to " जमुई की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई उड़ान: रावणेश्वर हॉल के जीर्णोद्धार के साथ शुरू हुआ सांस्कृतिक पुनर्जागरण"

Post a Comment

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article