मनरेगा में बड़ा खेल? कागजों पर सैकड़ों मजदूर, लेकिन जमीन पर सन्नाटा; गरसंडा पंचायत में उठ रहे गंभीर सवाल
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जमुई सदर प्रखंड अंतर्गत गरसंडा पंचायत में मनरेगा के तहत संचालित योजनाओं को लेकर अब कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सरकारी रिकॉर्ड, मस्टर रोल और योजनाओं में बड़ी संख्या में मजदूरों को रोजगार दिए जाने की बात सामने आ रही है, लेकिन जमीनी तस्वीर कई सवाल पैदा करती दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार पंचायत में एक दिन में लगभग 13 योजनाएं संचालित होने की बात सामने आ रही है। इनमें से केवल चार योजनाओं के दस्तावेज और मस्टर रोल की जानकारी पर नजर डालने से ही कई सवाल खड़े होने लगे हैं।
Work Code : 0550007/WC/20703597
MSR No. : 4762
कार्य : ग्राम सोनपे में चेक डैम आहर की खुदाई कार्य
मजदूर दर्ज : लगभग 50
Work Code : 0550007/WC/20715788
MSR No. : 4771
कार्य : पूर्णा बुकार में सार्वजनिक पोखर का जीर्णोद्धार कार्य
मजदूर दर्ज : लगभग 50–55
Work Code : 0550007012/WC/20712607
MSR No. : 4776
कार्य : दक्षिणी भाग बहिरा आहर की खुदाई कार्य
मजदूर दर्ज : लगभग 50
Work Code : 0550007012/WC/20800158
MSR No. : 5686
कार्य : गाड़ी बुकार में सार्वजनिक पोखर का जीर्णोद्धार कार्य
मजदूर दर्ज : लगभग 60
इन चार योजनाओं में ही लगभग 210 से अधिक मजदूरों को कार्यरत दिखाया गया है। जबकि पंचायत में लगभग 13 योजनाएं संचालित होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में यदि केवल चार योजनाओं में ही इतने सवाल उठ रहे हैं तो बाकी योजनाओं की वास्तविक स्थिति क्या होगी, यह अपने आप में बड़ा प्रश्न बनता दिखाई दे रहा है। यदि एक ही पंचायत क्षेत्र में प्रतिदिन 500 से 700 मजदूर कार्य कर रहे हों, तो कार्यस्थलों पर बड़ी संख्या में लोगों की गतिविधियां दिखाई देनी चाहिए। मिट्टी कटाई, पोखर जीर्णोद्धार, आहर खुदाई जैसे कार्यों में व्यापक प्रगति दिखाई देनी चाहिए। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते दिखाई दे रहे हैं।
इसी बीच पंचायत स्तर पर कार्य से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कई गंभीर दावे किए हैं। बातचीत के दौरान उसने कथित तौर पर कहा कि योजनाओं को संचालित करने में विभिन्न स्तरों पर परसेंटेज तय होने की बात कही जाती है। संबंधित व्यक्ति ने दावा किया कि लगभग 3 प्रतिशत से शुरुआत होकर 10 से 15 प्रतिशत तक हिस्सेदारी विभिन्न स्तरों तक पहुंचने की चर्चा होती है। उसने यह भी दावा किया कि योजना से जुड़े पदों पर कार्यरत लोगों के हिस्से तय होने की बात कही जाती है और बिना भुगतान के काम को आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता है। संबंधित व्यक्ति ने यह भी दावा किया कि हम लोगों को लगभग 40 प्रतिशत में काम करना पड़ता है, इसलिए जैसे-तैसे काम कराया जाता है। जिसे कुछ देर में आपके सामने प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं इस पूरे मामले को लेकर जब हमारी टीम ने मनरेगा विभाग के PO से बातचीत करने का प्रयास किया तो उनका कहना था कि जब आवेदन आएगा तभी जांच की जाएगी और तभी पता चल पाएगा कि भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी योजनाओं की जांच केवल आवेदन मिलने के बाद ही होगी? क्या विभागीय जिम्मेदारी केवल कार्यालय तक सीमित है? क्या बंद कमरों में बैठकर तैयार की गई रिपोर्ट ही जमीनी सच्चाई तय करेगी? या फिर अधिकारी कार्यस्थलों पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच भी करेंगे?
फिलहाल गरसंडा पंचायत में मनरेगा योजनाओं को लेकर उठ रहे सवाल अब चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग इन सवालों की जांच करता है या फिर सरकारी कागजों पर दर्ज आंकड़े ही विकास की तस्वीर बनकर रह जाएंगे। वहीं इस पूरे मामले में जब पंचायत के मुखिया अशोक पासवान से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि “गर्मी और ज्यादा तापमान होने के कारण मजदूर कार्यस्थल पर नहीं आ पाए हैं। हालांकि यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता दिखाई दे रहा है कि यदि मजदूर कार्यस्थल पर नहीं पहुंचे, तो फिर मस्टर रोल और उपस्थिति रजिस्टर में लगभग 530 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होने की बात कैसे सामने आ रही है? यदि कार्यस्थलों पर मजदूरों की संख्या कम थी, तो दर्ज की गई उपस्थिति और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर क्यों दिखाई दे रहा है?



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