जर्जर घोषित भवन में संचालित हो रहा प्रखंड कृषि कार्यालय, सुरक्षित भवन में स्थानांतरण की मांग
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जिला मुख्यालय स्थित प्रखंड कृषि कार्यालय वर्षों से जर्जर एवं असुरक्षित घोषित भवन में संचालित हो रहा है। भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, जिससे यहां कार्यरत कर्मचारियों, कार्यालय आने वाले किसानों तथा महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी सौरव कुमार ने जिला पदाधिकारी को पत्र भेजकर कार्यालय को सुरक्षित भवन में स्थानांतरित करने की मांग की है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र में बताया गया है कि प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित पुराने भवन में कृषि कार्यालय का संचालन किया जा रहा है। भवन निर्माण विभाग द्वारा इस भवन को पूर्व में ही जर्जर एवं असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद कार्यालय का संचालन जारी रहने से किसी भी समय अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है।
पत्र में कहा गया है कि बरसात के दौरान भवन की छत से पानी टपकता है, जिससे महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख, कंप्यूटर तथा कृषि योजनाओं से संबंधित दस्तावेजों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। वहीं किसानों को बीज वितरण, कृषि योजनाओं की जानकारी एवं अन्य विभागीय सेवाएं उपलब्ध कराने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार कार्यालय भवन की चारों ओर की दीवारों में दरारें उभर आई हैं। भवन के समीप निर्माणाधीन भवन का असर भी पुराने ढांचे पर पड़ रहा है, जिससे कई हिस्सों में दीवारें झुकती हुई दिखाई दे रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों और किसानों के बीच हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। गौरतलब है कि यह कार्यालय जिले के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्र में स्थित है। प्रखंड कृषि कार्यालय के आसपास समाहरणालय, प्रखंड कार्यालय, सर्किट हाउस सहित कई प्रमुख सरकारी कार्यालय मौजूद हैं। वहीं जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी आवास भी यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित हैं।
इसके बावजूद जर्जर भवन में संचालित इस कार्यालय की समस्या का अब तक समाधान नहीं हो पाना चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर कृषि विभाग खरीफ मौसम को लेकर किसानों के बीच जागरूकता अभियान चला रहा है तथा कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विभाग का अपना कार्यालय ही असुरक्षित भवन में संचालित हो रहा है। ऐसे में विभागीय कार्यों के सुचारू संचालन और किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जमुई के जिला पदाधिकारी नवीन कुमार के नेतृत्व में जिले में कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों को गति मिली है। मिनी बाइपास परियोजना, ऐतिहासिक महाराज रामेश्वर उच्च विद्यालय परिसर के विकास तथा गुरमाहा और चोरमारा जैसे क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार जैसे कार्यों की सराहना की जाती रही है। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि जिला मुख्यालय में स्थित प्रखंड कृषि कार्यालय की यह गंभीर समस्या अब तक प्रशासन की प्राथमिकता में क्यों नहीं आ सकी। प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने अपने पत्र में बताया है कि कृषि विभाग के लिए निर्मित ई-किसान भवन वर्तमान में अन्य उपयोग में होने के कारण वहां कार्यालय का संचालन संभव नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने जिला प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर कृषि कार्यालय को किसी सुरक्षित एवं उपयुक्त भवन में स्थानांतरित करने की मांग की है। अब किसानों, कर्मचारियों और आम लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस जर्जर भवन की समस्या का समाधान कब तक होता है और कृषि कार्यालय को सुरक्षित भवन कब उपलब्ध कराया जाता है
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