बरनार नदी के मौरा बालू घाट पर खनन के विरोध में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू
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बरनार नदी के मौरा बालू घाट पर संवेदक द्वारा किए जा रहे बालू खनन के विरोध में सोमवार से मौरा, प्रधानचक, घौमपट, निजवारा और शीलेर गांव के दर्जनों किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। धरना का नेतृत्व मौरा पंचायत के पूर्व मुखिया एवं किसान नेता कांता सिंह तथा भाकपा (माले) नेता बाबू साहेब सिंह कर रहे हैं। धरना पर बैठे किसानों ने एक स्वर में मौरा बालू घाट को तत्काल बंद करने की मांग की। धरना को संबोधित करते हुए माले नेता बाबू साहेब सिंह ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन किसानों की जायज मांगों की लगातार अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि बालू तस्करों को स्थानीय राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त है, इसी कारण प्रशासन इस गंभीर समस्या पर आंख मूंदे बैठा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बालू सिंडिकेट के सामने जिला प्रशासन गूंगा-बहरा बना हुआ है, लेकिन अब किसानों की आवाज को हर हाल में सुना जाएगा। वहीं किसान नेता कांता सिंह ने कहा कि पिछले दस दिनों से दर्जनों गांवों के किसान मौरा नदी से निकलने वाली आधा दर्जन से अधिक सिंचाई पाइप लाइनों को बचाने के लिए आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार और जिला प्रशासन जानबूझकर उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेतरतीब बालू खनन के कारण सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे खेती-किसानी पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। कांता सिंह ने आरोप लगाया कि एक ओर किसान फसल बचाने और उपज बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन बालू संवेदकों की आवभगत में लगा हुआ है, जिसके कारण किसान खेती से वंचित होते जा रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से अविलंब बालू खनन पर रोक लगाने और किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की। धरना को किसान नेता कुणाल सिंह और शैलेंद्र कुमार सिंह ने भी संबोधित करते हुए आंदोलन को समर्थन दिया। धरना स्थल पर अवधेश सिंह, श्रवण कुमार यादव, समाजसेवी गौरव सिंह, अशोक सिंह, दिनेश रावत सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे।

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