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जमुई में पैक्स अध्यक्षों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण, डीएम ने कहा – ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं पैक्स

जमुई में पैक्स अध्यक्षों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण, डीएम ने कहा – ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं पैक्स



सहकारिता विभाग, बिहार सरकार के निर्देशानुसार जमुई जिला मुख्यालय स्थित न्यू द्वारिका विवाह भवन में पैक्स अध्यक्षों, प्रबंधकों तथा व्यापार मंडल अध्यक्षों के लिए एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला पदाधिकारी, जमुई द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर सहकारिता विभाग के अधिकारी, विषय विशेषज्ञ तथा बड़ी संख्या में पैक्स प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी ने कहा कि पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समिति) ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ पैक्सों को पारंपरिक कार्यों से आगे बढ़ते हुए व्यावसायिक विविधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाना होगा। डीएम ने बताया कि अब पैक्स केवल ऋण वितरण या खाद-बीज उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और डिपॉजिट मोबिलाइजेशन एजेंट के रूप में विकसित कर किसानों को बैंकिंग और डिजिटल सेवाएं भी उपलब्ध करानी होंगी। कार्यशाला के दौरान विषय विशेषज्ञों ने पैक्सों के सुदृढ़ीकरण पर विस्तार से चर्चा की। सेवानिवृत्त संयुक्त निबंधक अजय कुमार अलंकार ने प्रशासनिक एवं वित्तीय दायित्वों तथा उद्यमशीलता के विकास पर मार्गदर्शन दिया।

वहीं संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण) मुकेश कुमार और प्रभाकर कुमार ने पारदर्शी लेखा संधारण और समय पर अंकेक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रशिक्षण के दौरान धान अधिप्राप्ति, मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना और बिहार राज्य फसल सहायता योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की गईं। जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक हरेंद्र प्रसाद ने पैक्सों द्वारा पेट्रोल पंप संचालन, गोदाम निर्माण और बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की सदस्यता बढ़ाने जैसे नवाचारों की जानकारी दी। इसके अलावा नाबार्ड तथा सीएससी जमुई के प्रतिनिधियों ने पैक्सों के कंप्यूटरीकरण और डिजिटल सशक्तिकरण से संबंधित तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में जिला पदाधिकारी ने सभी पैक्स प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में लागू करें, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके और सहकारी आंदोलन को नई दिशा मिल सके।

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