जमुई में आरक्षण विवाद फिर गरमाया, हम पार्टी कार्यकर्ताओं ने सांसद अरुण भारती से मांगा चुनावी दस्तावेजों और पिता के नाम का जवाब
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सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र से हम पार्टी के विधायक प्रफुल्ल मांझी और जमुई लोकसभा क्षेत्र के सांसद अरुण भारती के बीच शुरू हुई बयानबाजी अब आरक्षण के मुद्दे से आगे बढ़कर व्यक्तिगत सवालों और विकास कार्यों तक पहुंचती दिखाई दे रही है।विवाद की शुरुआत आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और अनुसूचित जाति के भीतर उप-वर्गीकरण के मुद्दे को लेकर हुई। विधायक प्रफुल्ल मांझी ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए सांसद अरुण भारती और लोजपा रामविलास के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। इसके बाद सांसद अरुण भारती की ओर से भी पलटवार किया गया। अरुण भारती ने आरक्षण नीति और महादलित वर्गीकरण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी से कई सवाल किए। इसी राजनीतिक खींचतान के बीच शनिवार को जमुई सर्किट हाउस में हम पार्टी के राष्ट्रीय सचिव चंदन कुशवाहा, जिलाध्यक्ष मनोज मांझी सहित पार्टी के कई कार्यकर्ता सामने आए। कार्यकर्ताओं ने सांसद अरुण भारती के चुनावी दस्तावेजों, मतदाता पहचान पत्र और मतदाता सूची में दर्ज विवरण को लेकर सवाल उठाए। चंदन कुशवाहा ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए सांसद से उनके पिता के नाम और संबंधित पहचान संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की। वहीं, इस दौरान सांसद निधि के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। कार्यकर्ताओं का दावा है कि सांसद निधि से करीब नौ करोड़ रुपये के माध्यम से निजी कंपनी के जरिए लोकसभा क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट लगाने का काम कराया गया और इसमें कमीशन लिए जाने का आरोप लगाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन्हें फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।
लेकिन इस पूरे विवाद में अब सबसे बड़ा सवाल जमुई के विकास कार्यों को लेकर भी उठ रहा है। हम पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर विकास की बात हो रही है तो विधायक प्रफुल्ल मांझी अपने क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों और योजनाओं का हिसाब जनता के सामने रखें, वहीं सांसद अरुण भारती भी अपने कार्यकाल में जमुई लोकसभा क्षेत्र में लाई गई योजनाओं और विकास परियोजनाओं का ब्यौरा सार्वजनिक करें। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सांसद की ओर से जमुई में कोई बड़ी योजना नहीं लाई गई, बल्कि दूसरे स्तर पर स्वीकृत या चल रही योजनाओं का श्रेय लेने का काम किया जा रहा है। हालांकि, सांसद अरुण भारती के समर्थक इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते। संसद के रिकॉर्ड में अरुण भारती द्वारा जमुई से जुड़े कई मुद्दे उठाए जाने का उल्लेख है, जिनमें मेडिकल कॉलेज, रेलवे परियोजनाएं, स्किल इंडिया हब, केंद्रीय विश्वविद्यालय और खेल परिसर जैसे मुद्दे शामिल हैं। इधर, विधायक प्रफुल्ल मांझी पर लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों के बाद लोजपा रामविलास के जिलाध्यक्ष जीवन सिंह ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सांसद चुनाव आयोग के समक्ष आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर चुनाव जीतकर सदन पहुंचे हैं और पार्टी का ध्यान व्यक्तिगत विवाद के बजाय जमुई के विकास पर है।
यानी आरक्षण की समीक्षा से शुरू हुआ यह राजनीतिक विवाद अब पहचान, परिवार, विकास कार्यों और सांसद निधि तक पहुंच चुका है। अब सवाल यही है। क्या दोनों पक्ष जनता के सामने अपने-अपने विकास कार्यों का पूरा हिसाब रखेंगे? क्या आरक्षण के मुद्दे पर शुरू हुई यह बहस फिर नीतिगत चर्चा तक लौटेगी, या आने वाले दिनों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और ज्यादा तेज होंगे?


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