बड़े कारोबारियों के बीच जमुई के युवा की छोटी शुरुआत, कुल्हड़ दही के जरिए बना रहे अपनी पहचान
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सीमित संसाधनों से शुरू किया कारोबार, कुल्हड़ बनाने वाले कुम्हार से लेकर दूध और दुकान के कर्मचारियों तक कई लोगों को मिला रोजगार। बड़े-बड़े कारोबार और नामी ब्रांड के बीच अपनी अलग पहचान बनाने का सपना देखने वाले युवाओं की कमी नहीं है। लेकिन जब संसाधन सीमित हों और शुरुआत बिल्कुल छोटी हो, तब इस सपने को हकीकत में बदलना अपने आप में बड़ी चुनौती होती है। जमुई नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 15 में लगमा नहर स्थित काली मंदिर के समीप एक युवा ने इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए कुल्हड़ दही के कारोबार की शुरुआत की है। युवा का उद्देश्य सिर्फ अपना कारोबार खड़ा करना ही नहीं, बल्कि इसके जरिए दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार का अवसर पैदा करना है। मिट्टी के कुल्हड़ में तैयार की जा रही दही इस छोटे से कारोबार को स्थानीय स्तर पर एक अलग पहचान दे रही है। एक कारोबार से कई लोगों को मिला रोजगार इस कारोबार की खास बात यह है कि इससे सिर्फ दुकान चलाने वाले युवक की आमदनी नहीं हो रही, बल्कि इसके पीछे कई लोगों की रोजी-रोटी भी जुड़ी है। दही परोसने के लिए इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के कुल्हड़ तैयार करने वाले कुम्हार को काम मिला, वहीं दही के लिए दूध उपलब्ध कराने वाले दूध विक्रेता को भी नियमित ग्राहक मिला। इसके अलावा दही तैयार करने और दुकान पर ग्राहकों को सेवा देने वाले कर्मचारियों के लिए भी रोजगार का अवसर पैदा हुआ है।
यानी एक छोटी सी दुकान शुरू होने से रोजगार की एक पूरी छोटी श्रृंखला तैयार हो गई है। मिट्टी के कुल्हड़ में देसी स्वाद पर जोर कुल्हड़ में दही परोसने की परंपरा को आधुनिक अंदाज में लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पोस्टर में भी ताजा और गाढ़ा देसी दही, 100 प्रतिशत शुद्ध और प्राकृतिक होने का दावा किया गया है। मिट्टी के कुल्हड़ में दही मिलने से ग्राहकों को पारंपरिक स्वाद और अनुभव देने की कोशिश है। बड़े कारोबारियों के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश आज जब बाजार में बड़े-बड़े कारोबारी और ब्रांड मौजूद हैं, ऐसे समय में जमुई के एक युवा द्वारा सीमित संसाधनों के साथ अपने जिले में कारोबार शुरू करना स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है। छोटी शुरुआत से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे इस युवा का सपना है कि उसका कारोबार जमुई में अपनी अलग पहचान बनाए और भविष्य में इससे और अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। कहानी सिर्फ एक कुल्हड़ दही की नहीं, बल्कि उस सोच की है जिसमें एक छोटी शुरुआत के साथ खुद के लिए रोजगार पैदा करने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के रास्ते खोलने की कोशिश की जा रही है।


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