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जल संरक्षण को प्राथमिकता देकर ग्रामीण विकास को दें नई दिशा : डीएम

जल संरक्षण को प्राथमिकता देकर ग्रामीण विकास को दें नई दिशा : डीएम



विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम-2025 के प्रचार-प्रसार, जागरूकता और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शनिवार को जमुई के रावणेश्वर हॉल और झाझा टाउन हॉल में पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। रावणेश्वर हॉल में अलीगंज, सिकंदरा, जमुई, बरहट और खैरा प्रखंड के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वहीं झाझा टाउन हॉल में गिद्धौर, झाझा, लक्ष्मीपुर, सोनो और चकाई प्रखंड के प्रतिनिधि शामिल हुए। जमुई में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पदाधिकारी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया, जबकि झाझा में उप विकास आयुक्त ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। सम्मेलन में तीनों स्तरों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अलावा जिला व प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।  सम्मेलन को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी ने कहा कि जिले के सर्वांगीण विकास में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। जमुई की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए योजनाओं का सही तरीके से उपयोग जरूरी है। उन्होंने जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए सभी जल स्रोतों को चिह्नित कर व्यापक जल संचयन अभियान चलाने की अपील की। 

उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना विकास की कोई भी अवधारणा पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से योजनाओं को धरातल पर उतारने और लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने का आह्वान किया। डीएम ने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर जोर देते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारी परीक्षा पास कर सेवा में आते हैं और निर्धारित सेवा अवधि तक काम करते हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों को हर पांच वर्ष में जनता की अदालत में अपने कार्यों की परीक्षा देनी होती है। इसलिए जन-आकांक्षाओं पर खरा उतरना, समस्याओं का समाधान करना और विकास योजनाओं को धरातल पर उतारना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता और नैतिक जिम्मेदारी है। उप विकास आयुक्त ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में VB-G RAM G अधिनियम की भूमिका पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में अधिकारियों व प्रशिक्षकों ने अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी। बताया गया कि एक जुलाई 2026 से लागू इस योजना का उद्देश्य 125 दिनों के रोजगार की गारंटी के माध्यम से ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत जल सुरक्षा, बुनियादी ढांचा, आजीविका और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को शामिल किया गया है। ग्राम पंचायतों की भूमिका को योजना के सफल क्रियान्वयन और सामाजिक पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। सम्मेलन का समापन जल संरक्षण, ग्रामीण विकास को गति देने और पंचायतों को सशक्त बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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