मौरा घाट बंद को लेकर ‘नदी बचाओ अभियान’ को मिल रहा व्यापक समर्थन
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गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत मौरा घाट बंद को लेकर इन दिनों क्षेत्र में लगातार चर्चा बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम में मौरा क्षेत्र के किसानों ने नए सिरे से संगठित होकर बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, इस बार किसान आंदोलन को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और किसी भी स्तर पर कोई कसर छोड़ना नहीं चाहते। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। किसान रामप्रवेश राउत के नेतृत्व में दर्जनों किसानों ने मौरा पंचायत के विभिन्न टोलों में पहुंचकर “नदी बचाओ अभियान” के तहत ग्रामीणों को एकजुट करने का अभियान तेज कर दिया है। इस पहल को सैकड़ों ग्रामीणों का समर्थन मिल रहा है, जिससे किसानों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है। इस अभियान को मजबूती प्रदान करने में शैलेन्द्र सिंह उर्फ शैलेश सिंह की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। वे लगातार नदी बचाओ अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं और उनकी मेहनत अब असर दिखाने लगी है। पूर्व समिति सदस्य सरयू यादव ने कहा कि नदी बचाओ अभियान एक बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ सभी किसान एकजुट होकर जल्द ही निर्णायक आंदोलन करेंगे। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता गौरव सिंह राठौड़ ने किसानों की एकता को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जिस तरह किसान संगठित हो रहे हैं, वह एक सकारात्मक और सराहनीय पहल है। उन्होंने जिला प्रशासन से अविलंब अवैध बालू खनन पर रोक लगाने की मांग की। किसान नेता विक्रम यादव ने कहा कि सभी किसान पूरी तरह गोलबंद हैं और अब नए सिरे से लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि बालू खनन के कारण किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। यदि आने वाले समय में बालू खनन बंद नहीं हुआ तो किसानों को भूखमरी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इस मौके पर अलाउद्दीन अंसारी, रशीद अंसारी, निजामुद्दीन अंसारी, जाहिद अंसारी, आजाद अंसारी, केशव यादव, साकेंद्र यादव, श्यामसुंदर यादव, मिथिलेश कुमार, मोहम्मद शाहिद अंसारी एवं मोहम्मद फरीद अंसारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं किसान मौजूद रहे।


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