मानक के विपरीत बालू खनन को लेकर सरकार-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
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गिद्धौर। प्रखंड अंतर्गत मौरा निजुआरा बालू घाट पर मानक के विपरीत हो रहे बालू खनन के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। खेतिहर उपजाऊ भूमि, सिंचाई पैन और पेयजल संकट की आशंका को लेकर किसानों ने बालू घाट बंद कराने की मांग को लेकर सोमवार की संध्या उत्क्रमित उच्च विद्यालय, मौरा में बैठक कर आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया। वरिष्ठ किसान रामप्रवेश रावत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में किसानों ने सर्वसम्मति से “नदी बचाओ, खेती बचाओ, मजदूरों को काम मिले, कृषि आजीविका संरक्षित रहे” जैसे नारों के साथ आंदोलन को और धार देने का संकल्प लिया। किसानों ने कहा कि मौरा निजुआरा बालू घाट पर हो रहा खनन सरकारी मानकों के विरुद्ध है, जिससे खेतिहर जमीन बंजर होने के कगार पर है और सिंचाई पैन का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। बैठक में मौरा पंचायत के सरपंच अवधेश सिंह, पूर्व समिति सदस्य सरयुग प्रसाद यादव, अशोक सिंह, सुबोध यादव, टुनटुन सिंह, सुखदेव वेद, अलाउद्दीन अंसारी, विक्रम यादव, रिकेश दुबे, सच्चिदानंद रावत, अनिल रावत, पंकज कुमार सिंह, अर्जुन यादव, किशोरी यादव, अशोक यादव, रामावध रावत, सीताराम यादव सहित सैकड़ों ग्रामीण किसान मौजूद रहे। समाजसेवी शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि यह लड़ाई मजदूरों और किसानों के हक के लिए है, जिसे मजदूर किसान मोर्चा के बैनर तले आगे बढ़ाया जाएगा। किसानों ने बताया कि वे गांव के विभिन्न वार्डों में जाकर ग्रामीणों से समर्थन जुटा रहे हैं। आगामी सप्ताह मौरा गांव के किसान और मजदूर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों के शामिल होने की संभावना है।
इधर सोमवार को मौरा निजुआरा बालू घाट पर मानक के विपरीत खनन के विरोध में मौरा लेवा गांव के दर्जनों किसानों ललन कुमार, पप्पू राम, चंदन कुमार, बिपिन राम, रामदेव यादव, रविंद्र यादव, पंकज यादव, मनोज राम, महादेव यादव, धर्मेंद्र राम, पिताम्बर यादव, उमेश यादव, भृगु कुमार यादव, अर्जुन यादव, लालू कुमार, रौशन यादव, अभिनाश कुमार, सौदागर यादव, पवन कुमार सहित अन्य ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि संवेदक द्वारा किए जा रहे अवैध खनन से सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि बंजर हो रही है, जिससे पेयजल संकट भी गहराने लगा है। किसानों ने तत्काल बालू खनन पर रोक लगाने और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मजदूर किसान मोर्चा से जुड़े किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


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