जन-जन तक पहुंच रहा ‘स्वगणना अभियान’, पांडुलिपियों के संरक्षण को लेकर भी प्रशासन सक्रिय
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जिला पदाधिकारी श्री नवीन (भा.प्र.से.) के कुशल मार्गदर्शन में जमुई जिले में भारत की जनगणना 2027 के अंतर्गत चल रहा ‘स्वगणना अभियान’ तेजी पकड़ चुका है। प्रशासन की सक्रियता और तत्परता के कारण यह अभियान अब जन-जन तक पहुंचने लगा है। इसी क्रम में जनगणना प्रशिक्षण कोषांग के नोडल पदाधिकारी-सह-कार्यपालक अभियंता श्री गौतम कुमार एवं जिला कला संस्कृति पदाधिकारी श्री विकेश कुमार ने उझंडी क्षेत्र और कागेश्वर स्थान का दौरा किया। इस दौरान जनसंवाद के माध्यम से लोगों को स्वगणना पोर्टल की सरल प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई और अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की गई। दौरे के दौरान प्रशासनिक टीम ने जमुई के वरिष्ठ साहित्यकार श्री गिरिजानंद मणि के आवास पर पहुंचकर उनसे शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उनके परिवार को डिजिटल स्वगणना के महत्व से अवगत कराया गया, जिसके बाद परिवार ने उत्साहपूर्वक पोर्टल पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। इस मुलाकात के दौरान साहित्यकार श्री मणि की प्रमुख कृतियों—‘मणिमाला’, ‘प्रतिरोध’, ‘दृष्टिकोण’, ‘महाभारत की युद्ध कथा’, ‘बाल्मीकि क्या करें?’, ‘टूटते जुड़ते रिश्ते’ और ‘कबीराहा मरा नहीं’—पर भी चर्चा हुई। परिजनों ने बताया कि उनकी रचनाएं जमुई की सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सरोकारों का जीवंत चित्रण करती हैं। इस दौरान जिला पदाधिकारी की एक अन्य महत्वपूर्ण पहल ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस पहल का उद्देश्य जमुई की प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों को खोजकर उनका संरक्षण करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। जिला प्रशासन ने सभी प्रबुद्ध नागरिकों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे स्वगणना और पांडुलिपि सर्वेक्षण को एक साझा जिम्मेदारी के रूप में लें और इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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