-->
अंगदान-नेत्रदान का दिया संदेश, नेत्रहीनों को किया सम्मानित

अंगदान-नेत्रदान का दिया संदेश, नेत्रहीनों को किया सम्मानित



जमुई।
दधीचि देहदान समिति की ओर से सोमवार को जमुई शहर में ब्लाइंड वॉक का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य लोगों को अंगदान और नेत्रदान के प्रति जागरूक करना तथा दृष्टिबाधित लोगों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना था। डीडीसी सुभाष चंद्र मंडल, साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार, स्वामी निरंजनानंद योग केंद्र के प्रधान स्वामी आत्मस्वरूप, दधीचि देहदान समिति के मुख्य संरक्षक डॉ. मनोज कुमार सिन्हा एवं समाजसेवी प्रकाश कुमार भगत ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर ब्लाइंड वॉक को रवाना किया। प्रतिभागियों ने आंखों पर काली पट्टी बांधकर गांधी पार्क से पैदल मार्च शुरू किया। यह यात्रा मुख्य बाजार होते हुए कचहरी चौक पहुंची, जहां पहुंचने के बाद वॉक सभा में तब्दील हो गई। प्रतीकात्मक रूप से आंखों पर पट्टी बांधकर निकाली गई इस यात्रा के माध्यम से लोगों को यह महसूस कराने का प्रयास किया गया कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों को रोजमर्रा के जीवन में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कार्यक्रम के दौरान दधीचि देहदान समिति की ओर से जमुई निवासी नेत्रहीन मनोज, महादेव सिमरिया निवासी विजय साव एवं फूलो देवी समेत अन्य जरूरतमंदों को राशन किट और नगद राशि देकर सम्मानित किया गया। समिति के अध्यक्ष प्रदीप केशरी ने कहा कि ब्लाइंड वॉक का उद्देश्य अंगदान और नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के साथ ही इस पुनीत कार्य को लेकर समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद नेत्रदान कर कोई व्यक्ति दूसरे के जीवन में रोशनी ला सकता है। इसलिए अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान का संकल्प लेना चाहिए। समिति के मुख्य संरक्षक डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने कहा कि जीते-जी रक्तदान और मृत्यु के बाद अंगदान एवं नेत्रदान मानवता की बड़ी सेवा है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके अंग जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदान साबित हो सकते हैं। उन्होंने अंगदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया। समाजसेवी प्रकाश कुमार भगत ने लोगों से जनहित में मृत्यु के बाद अपने अंग एवं नेत्रदान करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्तदान से किसी की जान बचाई जा सकती है, जबकि अंगदान और नेत्रदान से कई परिवारों की खुशियां लौट सकती हैं। समिति के सचिव दिलीप साह ने चिकित्सा शिक्षा में देहदान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के लिए फिलहाल 40 मेडिकल छात्रों पर एक कैडवर उपलब्ध कराया जा रहा है, जो पर्याप्त नहीं है। उन्होंने चार छात्रों पर एक कैडवर उपलब्ध कराने की मांग की और कहा कि कुशल चिकित्सकों के प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के लिए देहदान आवश्यक है। कार्यक्रम में शम्भू कुमार, शंकर साह, महेश केशरी, कुंज बिहारी बंका, चंद्रकांत भगत, चंद्रदेव सिंह, शिवदानी बरनवाल, शिवशंकर साहू, श्रीकांत जी, अजीत कुमार, मनोज कुमार गुप्ता, चक्रधारी बरनवाल, मो. मोती उल्लाह, राजा राम केशरी, डॉ. बी. मोदी, राज्य उद्घोषक डॉ. निरंजन कुमार सहित अन्य लोगों ने भी लोगों को रक्तदान, देहदान एवं नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान “जीते जी रक्तदान, मृत्यु के बाद अंगदान” का संदेश दिया गया। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवकों एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अंत में प्रतिभागियों ने अंगदान एवं नेत्रदान के प्रति समाज को जागरूक करने का संकल्प लिया।

0 Response to "अंगदान-नेत्रदान का दिया संदेश, नेत्रहीनों को किया सम्मानित"

Post a Comment

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article